13 verses
1रावनु रथी बिरथ रघुबीरा।
2अधिक प्रीति मन भा संदेहा।
3नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना।
4सुनहु सखा कह कृपानिधाना।
5सौरज धीरज तेहि रथ चाका।
6बल बिबेक दम परहित घोरे।
7ईस भजनु सारथी सुजाना।
8दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा।
9अमल अचल मन त्रोन समाना।
10कवच अभेद बिप्र गुर पूजा।
11सखा धर्ममय अस रथ जाकें।
12महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।
13सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।